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बांग्लादेश में 82 फुट ऊंची भगवान राम की प्रतिमा का निर्माण कार्य रुका, कट्टरपंथी डाल रहे अड़ंगा

By वीएसके डेस्क June 15, 2026
समाचार › देश-विशेष
बांग्लादेश में 82 फुट ऊंची भगवान राम की प्रतिमा का निर्माण कार्य रुका, कट्टरपंथी डाल रहे अड़ंगा
ढाका/गायबांधा। बांग्लादेश के उत्तरी जिले गायबांधा के पलाशबाड़ी क्षेत्र में निर्माणाधीन 82 फुट ऊंची भगवान राम की प्रतिमा का कार्य फिलहाल रोक दिया गया है। इस निर्णय के पीछे स्थानीय कट्टरपंथी संगठनों के विरोध और दबाव को प्रमुख कारण बताया जा रहा है। यह प्रतिमा श्री श्री राधा गोविंद एवं काली मंदिर परिसर में बनाई जा रही थी और इसे एशिया की सबसे ऊंची राम प्रतिमाओं में से एक बताया जा रहा था। मंदिर समिति के अनुसार परियोजना का उद्देश्य धार्मिक आस्था के साथ साथ क्षेत्र में सांस्कृतिक और आध्यात्मिक पर्यटन को बढ़ावा देना था।

विरोध के बाद थमा निर्माण

स्थानीय मीडिया रिपोर्टों के अनुसार कुछ इस्लामी संगठनों और इमाम-उलेमा समूहों ने प्रतिमा निर्माण का विरोध करते हुए प्रदर्शन किए। कई स्थानों पर मानव शृंखलाएं बनाकर आंदोलन भी किया। मंदिर के सलाहकार श्यामल कुमार महंत ने प्रेस वार्ता में कहा कि सामाजिक सौहार्द बनाए रखने और किसी भी अप्रिय स्थिति से बचने के लिए निर्माण रोक दिया गया है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि मंदिर समिति बातचीत के माध्यम से समाधान चाहती है।

पहले से हैं विशाल हिंदू प्रतिमाएं

इस मंदिर परिसर में पहले से लगभग 30 फुट ऊंची शिव प्रतिमा और 53 फुट ऊंची कृष्ण प्रतिमा स्थापित हैं। परिसर में सौ से अधिक देवी-देवताओं की मूर्तियां भी प्रतिष्ठित हैं। पूरे मामले में बांग्लादेश की निर्वासित लेखिका और मानवाधिकार कार्यकर्ता तस्लीमा नसरीन ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि यदि बांग्लादेश में लाखों मुसलमानों के लिए मस्जिदें बन सकती हैं तो हिंदू अल्पसंख्यकों को भी अपने धार्मिक स्थलों और प्रतीकों के निर्माण का समान अधिकार मिलना चाहिए। उन्होंने धार्मिक स्वतंत्रता को सभी समुदायों के लिए समान रूप से लागू करने की आवश्यकता पर बल दिया। मानवाधिकार संगठनों और अल्पसंख्यक प्रतिनिधियों का कहना है कि पिछले कुछ वर्षों में मंदिरों पर हमले, मूर्ति तोड़फोड़, भूमि कब्जे और सांप्रदायिक हिंसा की घटनाएं बढ़ी हैं, जो चिंता का विषय है। ऐसे में राम प्रतिमा परियोजना का रुकना केवल एक निर्माण परियोजना का ठहर जाना नहीं बल्कि धार्मिक स्वतंत्रता और अल्पसंख्यक अधिकारों से जुड़ा मामला है। स्थानीय प्रशासन ने क्षेत्र में सुरक्षा बढ़ा दी है और स्थिति पर नजर रखी जा रही है। मंदिर समिति को आशा है कि संवाद और प्रशासनिक सहयोग के माध्यम से भविष्य में निर्माण कार्य फिर शुरू हो सकेगा।

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