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आध्यात्मिक इंटेलिजेंस से ही आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को नियंत्रित किया जा सकता है : बी. आर. शंकरानंद

गुरु-शिष्य परंपरा भारतीय संस्कृति का मूल आधार : राज्यपाल हरिभाऊ बागड़े

By चंद्रशेखर December 23, 2025
समाचार
आध्यात्मिक इंटेलिजेंस से ही आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को नियंत्रित किया जा सकता है : बी. आर. शंकरानंद

गुरु-शिष्य परंपरा भारतीय संस्कृति का मूल आधार : राज्यपाल हरिभाऊ बागड़े

जयपुर। भारतीय शिक्षण मंडल, जयपुर प्रान्त के तत्वावधान में राजस्थान विश्वविद्यालय के आर. ए. पोद्दार संस्थान में आज भारतीय शिक्षण मंडल की वार्षिक पत्रिका ‘रश्मिपथ’ का भव्य विमोचन राजस्थान के माननीय राज्यपाल श्री हरिभाऊ बागड़े एवं भारतीय शिक्षण मंडल के अखिल भारतीय संगठन मंत्री माननीय श्री बी. आर. शंकरानंद के कर-कमलों से संपन्न हुआ। इस अवसर पर “AI के युग में बदलता हुआ शिक्षा का परिदृश्य एवं राष्ट्र निर्माण में शिक्षण संस्थानों की भूमिका” विषय पर एक बौद्धिक गोष्ठी का भी आयोजन किया गया। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए राज्यपाल श्री हरिभाऊ बागड़े ने कहा कि गुरु-शिष्य परंपरा भारतीय संस्कृति की आत्मा है, जिसने सदियों से ज्ञान, संस्कार और मूल्यों को सुरक्षित रखा है। उन्होंने कहा कि तकनीकी युग में भी शिक्षा का उद्देश्य केवल कौशल विकास नहीं, बल्कि चरित्र निर्माण होना चाहिए। राज्यपाल ने गरीब एवं वंचित विद्यार्थियों को आधुनिक तकनीक और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा से जोड़ने पर विशेष बल दिया तथा शिक्षकों से अनुशासन, मर्यादा और आदर्श आचरण द्वारा समाज को दिशा देने का आह्वान किया।
भारतीय शिक्षण मंडल के अखिल भारतीय संगठन मंत्री श्री बी. आर. शंकरानंद ने अपने वक्तव्य में कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को आध्यात्मिक इंटेलिजेंस एवं विवेक के माध्यम से ही संतुलित और नियंत्रित किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि AI जैसी तकनीक भारत के लिए नई नहीं है, क्योंकि भारतीय समाज परिवर्तन और नवाचार को आत्मसात करता आया है, इसी कारण वह सनातन एवं मृत्युंजय बना है। उन्होंने विवेक, संस्कार और मूल्यों के विकास पर जोर देते हुए कहा कि विद्यालय का वातावरण घर जैसा और घर का वातावरण विद्यालय जैसा होना चाहिए, तभी AI का सकारात्मक उपयोग संभव है। राजस्थान केंद्रीय विश्वविद्यालय के माननीय कुलगुरु प्रो. आनंद भालेराव ने AI की कार्यप्रणाली, संभावनाओं एवं शिक्षा क्षेत्र में उसके प्रभाव पर प्रकाश डाला। वहीं प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य डॉ. केदार शर्मा ने हिंदू संस्कृति के 16 संस्कारों को वैज्ञानिक बताते हुए उन्हें आज भी पूर्णतः प्रासंगिक बताया। जयपुर प्रान्त अध्यक्ष एवं राजस्थान विश्वविद्यालय की माननीय कुलगुरु प्रो. अल्पना कटेजा ने भारतीय शिक्षण मंडल का परिचय देते हुए वार्षिक पत्रिका ‘रश्मिपथ’ के उद्देश्य और वैचारिक दृष्टि की जानकारी दी।कार्यक्रम के अंत में प्रान्त उपाध्यक्ष प्रो. जयदीप जी ने सभी का आभार व्यक्त किया । मंच संचालन सह प्रान्त मंत्री डॉ नीलम पुनार ने किया । कार्यक्रम में भारतीय शिक्षण मंडल राजस्थान क्षेत्र संयोजक प्रो. गजेंद्र पाल सिंह, राजस्थान क्षेत्र के बौद्धिक प्रमुख डॉ. श्रीकान्त, अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख संजय पाठक, सहित अनेक शिक्षाविद्, बुद्धिजीवी, शोधार्थी एवं विद्यार्थी उपस्थित रहे।

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