Breaking News
VSK Foundation Jaipur Logo - विश्व संवाद केंद्र जयपुर
विश्व संवाद केंद्र, जयपुर ( VSK Foundation Jaipur )

“भारतीय दृष्टि में नारी चिंतन” पुस्तक का हुआ विमोचन

नारी और पुरुष भारतीय दृष्टि में परस्पर पूरक हैं, और यही चिंतन भारतीय समाज की आधारशिला है: डॉ.कृष्णगोपाल

By चंद्रशेखर January 03, 2026
समाचार › राजस्थान विविध
“भारतीय दृष्टि में नारी चिंतन” पुस्तक का हुआ विमोचन
जयपुर,02 जनवरी । भारतीय संस्कृति में नारी की स्वतंत्रता, कर्तव्य, सृजनशीलता और उसकी आध्यात्मिक चेतना को रेखांकित करने वाली पुस्तक “भारतीय दृष्टि में नारी चिंतन” का विमोचन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सह सरकार्यवाह डॉ.कृष्ण गोपाल जी के द्वारा से संपन्न हुआ। इस पुस्तक का विमोचन पाथेय कण द्वारा आयोजित पूज्य रज्जु भैया स्मृति व्याख्यान के अवसर पर हुआ । इस अवसर पर बड़ी संख्या में विद्वान, प्रबुद्ध नागरिक, मातृशक्ति एवं सामाजिक-सांस्कृतिक क्षेत्र से जुड़े लोग उपस्थित रहे। विमोचन अवसर पर अपने उद्बोधन में डॉ. कृष्ण गोपाल जी ने कहा कि भारतीय परंपरा में नारी को केवल अधिकारों की इकाई नहीं, बल्कि संस्कृति, सृजन और संस्कार की केंद्र-बिंदु शक्ति के रूप में देखा गया है। नारी और पुरुष भारतीय दृष्टि में परस्पर पूरक हैं, और यही चिंतन भारतीय समाज की आधारशिला है। “भारतीय दृष्टि में नारी चिंतन” पुस्तक में वैदिक, उपनिषदिक, रामायण–महाभारत, बौद्ध, जैन, संत तथा आधुनिक काल तक फैले नारी चिंतन को समग्र भारतीय परिप्रेक्ष्य में प्रस्तुत किया गया है। यह ग्रंथ पश्चिमी नारीवाद के टकरावपूर्ण दृष्टिकोण के स्थान पर संतुलित, सकारात्मक और सांस्कृतिक नारी दृष्टि को सामने रखता है। पुस्तक के संपादक बिरेन्द्र पाण्डेय ने बताया कि इक्कीसवीं शताब्दी में नारी विमर्श प्रायः संघर्ष, टकराव और प्रतिद्वंद्विता के स्वर में प्रस्तुत होता रहा है। इसके विपरीत यह ग्रंथ यह स्पष्ट करता है कि भारतीय दृष्टि में नारी और पुरुष विरोधी नहीं, बल्कि परस्पर पूरक हैं—शक्ति और शिव की भाँति। वेदों की गार्गी और मैत्रेयी से लेकर सीता, द्रौपदी, मीरा, अहिल्याबाई होलकर तक—भारतीय परंपरा में नारी केवल सहनशील नहीं, निर्णायक, नेतृत्वकर्ता और मूल्य-निर्माता रही है।

Related Articles

सक्षम संस्था जयपुर द्वारा जयपुर शहर में एक दिवसीय नेत्र जाँच महाशिविर का आयोजन

शिविर में वरिष्ठ नेत्र रोग विशेषज्ञों की सेवाएं निःशुल्क उपलब्ध रही

Mar 31, 2026

विविधता वास्तव में एकता का शृंगार और उत्सव है, न कि विभाजन का कारण – डॉ. मोहन भागवत

जैसलमेर की धरा पर ‘समरसता’ का शंखनाद; चादर महोत्सव में सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत के साथ संत जनों और सर्व समाज का महासंगम

Mar 07, 2026

छुआछूत को भूलकर हर हिन्दू को गले लगाएंगे तो होगा सभी समस्याओं का समाधान: प्रकाशदास महाराज

-रामपुरा डाबड़ी में विराट हिंदू सम्मेलन में दिया संस्कृति और राष्ट्र एकता का संदेश

Jan 28, 2026

स्व को जगाने की आवश्यकता है: जे. नंदकुमार

जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल के अंतिम दिन जे. नंदकुमार द्वारा लिखित नेशनल सेल्फहुड इन साइंस नामक पुस्तक पर परिचर्चा

Jan 20, 2026