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संघ का किसी से कोई द्वेष नहीं, सबके साथ संवाद की भावना – सुनील आंबेकर

नागपुर में पत्रकारों व संपादकों की विशेष संगोष्ठी

By चंद्रशेखर May 30, 2026
समाचार › संघ व विविध संगठन
संघ का किसी से कोई द्वेष नहीं, सबके साथ संवाद की भावना – सुनील आंबेकर
नागपुर में पत्रकारों व संपादकों की विशेष संगोष्ठी में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख सुनील आंबेकर जी ने कहा कि राजनीतिक स्वार्थों के कारण राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के बारे में अक्सर कई तरह की गलत जानकारी फैलाई जाती है। लेकिन, असल में संघ किसी से द्वेष नहीं करता और न ही किसी से कोई दुश्मनी है। संघ सभी को अपना मानता है और समाज के सभी लोगों से बातचीत करने की भावना रखता है। इसीलिए संघ हमेशा संवाद और चर्चा के लिए तैयार रहता है। सिविल लाइंस के चिटनविस सेंटर में आयोजित मीडिया संगोष्ठी में विदर्भ प्रांत संघचालक दीपक जी तामशेट्टीवार, नागपुर महानगर संघचालक राजेश जी लोया उपस्थित रहे। प्रांत के बड़े समाचार पत्रों तथा न्यूज़ चैनलों के संपादक, ब्यूरो चीफ और सीनियर पत्रकार मुख्य रूप से संगोष्ठी में उपस्थित रहे। सुनील आंबेकर जी ने संघ का शताब्दी वर्ष तक का प्रवास, समाज से संघ की आत्मीयता और भविष्य के मार्ग पर जानकारी दी। संघ का प्रारंभ से ही मानना है कि भारत एक हिन्दू राष्ट्र है। अगर इस देश के हिन्दू मजबूत होंगे, तो यह समाज के सभी पंथों, जिसमें मुस्लिम और ईसाई भी शामिल हैं, के हित में होगा। इससे समाज और देश दोनों का लाभ होगा। अगर भारत का हित होगा, तो दुनिया का भी हित होगा। इसलिए हिन्दुओं का मजबूत होना जरूरी है। जो लोग जाति की राजनीति करना चाहते हैं, वे इस संकल्पना का विरोध करते हैं। आजकल कुछ लोग जय भीम-लाल सलाम जैसे नारे लगा रहे हैं। वास्तव में, डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर ने खुद कहा था कि जब तक दुनिया में गौतम बुद्ध का दिखाया शांति का मार्ग है, तब तक कार्ल मार्क्स या दूसरों के मार्ग पर चलने की जरूरत नहीं है। उनके बुनियादी विचारों को ध्यान में रखना चाहिए। बाबासाहेब आंबेडकर ने संविधान सभा में अपने भाषण में भी कहा था कि कम्युनिस्ट और सोशलिस्ट संविधान के सबसे बड़े शत्रु हैं।

संघ कर रहा है विदेशों के बुद्धिजीवियों से संवाद

सुनील जी आंबेकर ने कहा कि विश्व के कई देशों में भारत और संघ के बारे में गलत धारणाएं हैं। उन्हें संघ के बारे में बहुत कम जानकारी है। ऐसे देशों में बुद्धिजीवियों, समाज के नेता, पत्रकारों से संवाद करने पर ज़ोर दिया जा रहा है। हमारे देश में लोग अपनी सांस्कृतिक विरासत भी भूल गए हैं। संघ उनके बीच इस स्मृतिभ्रंश को दूर करने और उनकी अपनी पहचान जागृत करने की कोशिश कर रहा है।

GenZ राष्ट्र प्रेमी, देश पर उनका परम विश्वास

दुनिया भर के कुछ देशों में, GenZ पीढ़ी ने विरोध प्रदर्शन किए और सड़कों पर उतरे। लेकिन, भारत में GenZ का परम विश्वास है। उन्हें देश और लोकतंत्र पर पूरा विश्वास है। यह पीढ़ी आशावादी है और लगातार भारत के विकास के बारे में सोचती है। उनका मानना है कि कोई भी मुद्दा शांति से हल किया जा सकता है।

तो देश का विभाजन नहीं होता

उन्होंने कहा कि अगर संघ की शक्ति उस काल खंड में होती तो शायद देश विभाजन नहीं होता। पर, उस स्थिति में भी संघ ने हिन्दुओं की रक्षा, पुनर्वास के लिए पूर्ण शक्ति के साथ प्रयास किए थे। जो स्वाधीनता के नायक थे, उनके विषय में विभाजन के बाद नकारात्मक वातावरण बना। लोग संघ को राजनीतिक प्रतिद्वंदी समझ रहे थे और राजनितीक कारणों की वजह से ही संघ पर प्रतिबंध लगाया। संगोष्ठी में पश्चिम बंगाल से संबंधित प्रश्नों के उत्तर में कहा कि पश्चिम बंगाल में संघ के सर्वाधिक प्रचारक हैं। पश्चिम बंगाल में संघ का कार्य शुरुआत से चल रहा है। आद्य सरसंघचालक डॉ. हेडगेवार की शिक्षा कलकत्ता में हुई थी और १९३९ में बंगाल में कार्य के लिए गए थे। उसके बाद सभी सरसंघचालकों ने पश्चिम बंगाल में कार्य किया है। वर्तमान सरसंघचालक डॉ. मोहन जी भागवत जब सरकार्यवाह थे तो तीन वर्षों तक उनका केंद्र कलकत्ता (अभी का कोलकाता) ही था। बंगाल की भूमि में प्रचारकों के समर्पण से जन भावना जागृत हुई।

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