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गुरु का संकल्प ही दुनिया बदलता आया है : बाबूलाल

गुरु पूर्णिमा पर 'गुरु वंदन कार्यक्रम' में बोले प्रांत प्रचारक, शिक्षकों को बताया राष्ट्र निर्माण की सबसे बड़ी शक्ति

By चंद्रशेखर July 28, 2026
समाचार › संघ व विविध संगठन
गुरु का संकल्प ही दुनिया बदलता आया है : बाबूलाल
जयपुर, 28 जुलाई। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के जयपुर प्रांत प्रचारक बाबूलाल ने कहा कि "गुरु का संकल्प ही दुनिया बदलता आया है।" उन्होंने कहा कि शिक्षक, टीचर या मास्टर बनना अपेक्षाकृत सरल है, लेकिन गुरु वही है जो आने वाले पाँच सौ वर्षों के राष्ट्र के भविष्य को देख सके और अपने संस्कारों एवं दृष्टि से समाज को दिशा देने की क्षमता रखता हो। वे मंगलवार को गुरु पूर्णिमा की पूर्व संध्या पर अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ, राजस्थान (विद्यालय शिक्षा) द्वारा वर्धमान इंटरनेशनल स्कूल, जयपुर में आयोजित 'गुरु वंदन कार्यक्रम' को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि यदि आर्य समाज का योगदान नहीं होता तो भारत में वेदों का अस्तित्व संकट में पड़ सकता था। मूलशंकर को महर्षि दयानंद सरस्वती बनाने का श्रेय उनके गुरु स्वामी विरजानंद को जाता है। इतिहास का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि हारित ऋषि ने बप्पा रावल, गुरु विद्यारण्य ने हरिहर एवं बुक्का तथा समर्थ गुरु रामदास ने छत्रपति शिवाजी के माध्यम से राष्ट्र के भविष्य को नई दिशा प्रदान की। बाबूलाल ने कहा कि आज देश के सामने सबसे बड़ा संकट बाहरी सीमाओं से नहीं, बल्कि कमजोर और बिखरते परिवारों से उत्पन्न हो रहा है। उन्होंने बाल-संकट (चाइल्ड क्राइसिस), अविवाहित लोगों की बढ़ती संख्या और बदलते जनसांख्यिकीय संतुलन पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि जिस प्रकार कभी जनसंख्या वृद्धि को नियंत्रित करना आवश्यक माना जाता था, उसी प्रकार अब जनसंख्या स्थिरीकरण भी महत्वपूर्ण राष्ट्रीय विषय बन चुका है। उन्होंने नागरिक शिष्टाचार की पुनर्स्थापना का दायित्व शिक्षकों पर बताते हुए कहा कि राष्ट्र निर्माण में उनकी भूमिका सबसे महत्वपूर्ण है।
गुरु का संकल्प ही दुनिया बदलता आया है : बाबूलाल
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि हरिदेव जोशी पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. नंदकिशोर पाण्डेय ने कहा कि महर्षि वेदव्यास वैदिक संस्कृति के महान व्याख्याता थे। उन्होंने वेदों का चार भागों में विभाजन किया तथा पुराणों का संकलन किया। उनके सम्मान में ही व्यास पूर्णिमा को गुरु पूर्णिमा के रूप में मनाया जाता है। उन्होंने कहा कि देश में आज भी लगभग 50 लाख पांडुलिपियाँ अप्रकाशित हैं, जिन्हें हमारे पूर्वज गुरुओं ने कठिन परिस्थितियों में सुरक्षित रखा। उन्होंने मातृभाषा आधारित शिक्षा को व्यक्ति के सर्वांगीण विकास का आधार बताते हुए कहा कि विदेशी भाषाओं का ज्ञान अपेक्षाकृत कम समय में अर्जित किया जा सकता है।
गुरु का संकल्प ही दुनिया बदलता आया है : बाबूलाल
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ, राजस्थान (विद्यालय शिक्षा) के प्रदेशाध्यक्ष श्री रमेशचंद पुष्करणा ने कहा कि संगठन सनातन परंपराओं के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए कार्य कर रहा है। उन्होंने बताया कि लगभग 2.80 लाख सदस्यों के साथ यह प्रदेश का सबसे बड़ा शिक्षक संगठन है। संगठन गुणवत्तापूर्ण प्रशिक्षण के माध्यम से संस्कारित पीढ़ी के निर्माण के लिए कार्यरत है। उन्होंने बताया कि राज्य स्तर पर प्रभावी प्रार्थना सभा का प्रशिक्षण आयोजित किया जा चुका है तथा "हमारा विद्यालय, हमारा तीर्थ" अभियान के अंतर्गत श्री हनुमान सिंह द्वारा लिखित पुस्तक की 1.36 करोड़ प्रतियों का वितरण किया जाएगा। कार्यक्रम का संचालन प्रदेश अतिरिक्त महामंत्री श्री बसंत जिंदल ने किया।

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