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भारत की विकास अवधारणा आत्मकेंद्रित नहीं, बल्कि समाज केंद्रित रही है - डॉ. कृष्ण गोपाल

आत्मकेंद्रित विकास मॉडल व्यक्ति को समाज से अलग करता है, जिससे मानसिक तनाव और सामाजिक विघटन बढ़ता है।

By चंद्रशेखर January 03, 2026
समाचार › संघ व विविध संगठन
भारत की विकास अवधारणा आत्मकेंद्रित नहीं, बल्कि समाज केंद्रित रही है - डॉ. कृष्ण गोपाल
जयपुर, 02 जनवरी। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सह सरकार्यवाह डॉ. कृष्ण गोपाल ने कहा कि विकास का अर्थ केवल आर्थिक समृद्धि नहीं है। वास्तविक विकास वही है, जिसमें मनुष्य, समाज, परिवार और प्रकृति का संतुलित उत्थान हो। उन्होंने कहा कि भारत की विकास अवधारणा आत्मकेंद्रित नहीं, बल्कि समाज केंद्रित रही है और आज के वैश्विक परिदृश्य में यही दृष्टि सबसे अधिक प्रासंगिक है। डॉ. कृष्ण गोपाल शुक्रवार को पाथेय कण संस्थान में आयोजित पूज्य रज्जु भैया स्मृति व्याख्यानमाला में ‘स्व’ का बोध और विकास की अवधारणा विषय पर संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि किसी भी राष्ट्र के लिए “स्व का बोध” अत्यंत आवश्यक है। जब तक यह स्पष्ट नहीं होगा कि हमारे पूर्वज कौन थे, हमारी संस्कृति, भाषा और साहित्य क्या है तथा जीवन और जगत को देखने की हमारी दृष्टि क्या रही है, तब तक विकास की दिशा सही नहीं हो सकती। उन्होंने कहा कि भारत में जन्म लेने वाले प्रत्येक व्यक्ति के जीवन का एक स्थायी उद्देश्य है, जिसे हमारी परंपरा ने निर्धारित किया है। यह उद्देश्य केवल व्यक्तिगत उन्नति तक सीमित नहीं, बल्कि आत्मिक साधना के साथ पूरे समाज और सृष्टि के हित से जुड़ा हुआ है। भारत की परंपरा में भौतिक और आध्यात्मिक दोनों का समन्वित विकास रहा है और यही इसकी हजारों वर्षों पुरानी पहचान है। डॉ. कृष्ण गोपाल ने कहा कि भारत प्राचीन काल से ही वैभव सम्पन्न रहा है लेकिन उस वैभव का आधार केवल धन नहीं था। शिक्षा, ज्ञान, सामाजिक व्यवस्था, नैतिकता और सांस्कृतिक मूल्यों ने भारत को समृद्ध बनाया। उन्होंने कहा कि यह धारणा गलत है कि भारत हमेशा से गरीब रहा है; वास्तविकता यह है कि भारत ने लंबे समय तक वैश्विक आर्थिक और सांस्कृतिक जीवन में अग्रणी भूमिका निभाई। उन्होंने वर्तमान विकास मॉडल पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि गरीबी आज भी देश के लिए एक गंभीर और चिंता जनक समस्या बनी हुई है। आर्थिक प्रगति के बावजूद समाज का बड़ा वर्ग सीमित आय और संसाधनों में जीवन यापन कर रहा है। विकास का लाभ कुछ गिने-चुने शहरों और क्षेत्रों तक सीमित होना गंभीर असंतुलन की ओर संकेत करता है। डॉ. कृष्ण गोपाल ने कहा कि केंद्रीकृत विकास मॉडल भारत जैसे देश के लिए उपयुक्त नहीं है। विज्ञान और तकनीक पर आधारित यह मॉडल संसाधनों और अवसरों को सीमित केंद्रों में समेट देता है, जिससे बेरोजगारी, असमानता और सामाजिक असंतोष बढ़ता है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि ऐसा मॉडल न तो समाज में संतुलन स्थापित कर सकता है और न ही विश्व में शांति ला सकता है। उन्होंने कहा कि भारत का विकास मॉडल परिवार केंद्रित होना चाहिए। भारतीय समाज में परिवार सामाजिक व्यवस्था की मूल इकाई रहा है, जहां व्यक्ति समाज से जुड़कर आगे बढ़ता है। आत्मकेंद्रित विकास मॉडल व्यक्ति को समाज से अलग करता है, जिससे मानसिक तनाव और सामाजिक विघटन बढ़ता है। डॉ. कृष्ण गोपाल ने कहा कि विकास का उद्देश्य केवल आर्थिक आंकड़े बढ़ाना नहीं, बल्कि ऐसा समाज बनाना होना चाहिए, जहां शिक्षा, संस्कार, रोजगार और जीवन मूल्य समान रूप से विकसित हों। उन्होंने कहा कि विकेंद्रीकृत, समाज केंद्रित और मूल्य आधारित विकास ही भारत और विश्व के लिए स्थायी समाधान प्रस्तुत कर सकता है।

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