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शिक्षा का मूल उद्देश्य केवल रोजगार नहीं बल्कि चरित्र निर्माण भी हैं:- श्रीकांत, क्षेत्रिय बौद्धिक प्रमुख

भारतीय शिक्षा दिवस पर ‘विकसित भारत @2047 हेतु शिक्षा’ विषयक संवाद आयोजित, राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के प्रभावी क्रियान्वयन पर हुआ सार्थक मंथन

By वीएसके डेस्क July 09, 2026
समाचार › संघ व विविध संगठन
शिक्षा का मूल उद्देश्य केवल रोजगार नहीं बल्कि चरित्र निर्माण भी हैं:- श्रीकांत, क्षेत्रिय बौद्धिक प्रमुख
जयपुर, 9 जुलाई 2026। श्री महावीर कॉलेज, सी-स्कीम, जयपुर एवं शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास, राजस्थान के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित 'भारतीय शिक्षा दिवस समारोह' का गुरुवार को विमर्श का आयोजन संपन्न हुआ। शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास के स्थापना दिवस के उपलक्ष्य में 2 जुलाई से 9 जुलाई तक आयोजित इस सप्ताहव्यापी समारोह का प्रमुख विषय "विकसित भारत @2047 हेतु शिक्षा" रहा। कार्यक्रम में राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के प्रभावी क्रियान्वयन, भारतीय ज्ञान परंपरा तथा राष्ट्रनिर्माण में शिक्षा की भूमिका पर व्यापक चिंतन-मंथन किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलन एवं माँ सरस्वती के चित्र पर पुष्पार्चन के साथ हुआ। तत्पश्चात महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. आशीष गुप्ता ने सभी अतिथियों का स्वागत एवं परिचय प्रस्तुत किया। शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास के क्षेत्र सह-संयोजक नितिन कासलीवाल ने कहा कि "यदि राष्ट्र को परम वैभव की ओर ले जाना है तो शिक्षा को भारतीयता के आधार पर पुनर्संगठित करना होगा।" उन्होंने मातृभूमि, मातृभाषा, भारतीय शिक्षा पद्धति तथा भारतीय ज्ञान परंपरा की अनिवार्यता पर बल देते हुए कहा कि चरित्र निर्माण, संस्कारयुक्त शिक्षा और आत्मनिर्भर भारत का मार्ग भारतीय शिक्षा दर्शन से होकर ही जाता है। उन्होंने शिक्षा बचाओ आंदोलन, वैदिक गणित, पर्यावरण शिक्षा, तकनीकी शिक्षा, अनुसंधान, भारतीय ज्ञान प्रणाली तथा राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास द्वारा किए जा रहे विविध प्रयासों की जानकारी भी दी। मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के क्षेत्रीय बौद्धिक प्रमुख श्रीकांत ने अपने उद्बोधन में कहा कि राष्ट्र प्रथम का भाव ही भारतीय शिक्षा का मूल आधार है। उन्होंने विद्यार्थियों एवं शिक्षकों से आह्वान किया कि अध्ययन-अध्यापन केवल ज्ञानार्जन का माध्यम न होकर राष्ट्रचेतना, कर्तव्यबोध, स्वाभिमान एवं 'स्व' के बोध से युक्त जीवन निर्माण का माध्यम बने। उन्होंने भारतीय जीवन मूल्यों पर आधारित शिक्षा को विकसित भारत की आधारशिला बताते हुए राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 को भारतीय चिंतन के अनुरूप एक महत्वपूर्ण पहल बताया। कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि एवं उप-कुलसचिव (Deputy Registrar) डॉ. अरविन्द शर्मा ने सभी को भारतीय शिक्षा दिवस की शुभकामनाएँ देते हुए कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल रोजगार उपलब्ध कराना नहीं, बल्कि राष्ट्रनिष्ठ, संस्कारित एवं उत्तरदायी नागरिकों का निर्माण करना है। उन्होंने भारतीय दृष्टि के अनुरूप पठन-पाठन की आवश्यकता पर बल दिया। समारोह की अध्यक्षता करते हुए शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास, राजस्थान के प्रांत अध्यक्ष प्रो. राजीव सक्सेना ने कहा कि भारतीय शिक्षा व्यवस्था का मूल उद्देश्य ज्ञान के साथ-साथ संस्कार, नैतिकता, सांस्कृतिक चेतना और सामाजिक उत्तरदायित्व का विकास करना है। उन्होंने कहा कि विकसित भारत के निर्माण का आधार भारतीय जीवन मूल्यों से युक्त शिक्षा व्यवस्था ही बन सकती है। समारोह के विशेष उपस्थिति शिक्षा परिषद के सचिव सुनील बख्शी एवं राजस्थान विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति प्रो राजीव जैन, शिक्षा नीति क्रियान्वय के संयोजक डॉ श्याम सिंह राजपुरोहित रहे एवं अंत में सभी अतिथियों, शिक्षकों, विद्यार्थियों एवं सहभागियों के प्रति आभार व्यक्त किया गया। कार्यक्रम का समापन राष्ट्रभाव से ओतप्रोत वातावरण में "वन्दे मातरम्" के सामूहिक गायन के साथ हुआ।
शिक्षा का मूल उद्देश्य केवल रोजगार नहीं बल्कि चरित्र निर्माण भी हैं:- श्रीकांत, क्षेत्रिय बौद्धिक प्रमुख

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