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पंच परिवर्तन ही वर्तमान हिन्दुत्व का युगधर्म - दत्तात्रेय होसबाळे जी

पहले हिन्दू फिर लिंगायत - वचनानंद महास्वामी जी

By चंद्रशेखर May 17, 2026
समाचार › देश-विशेष
पंच परिवर्तन ही वर्तमान हिन्दुत्व का युगधर्म - दत्तात्रेय होसबाळे जी
पुणे, 16 मई 2026। राष्ट्रीय प्राकृतिक चिकित्सा संस्थान में आयोजित ‘अनंत आणि पद्मा बिरादार परिवार’ के स्नेहमिलन तथा परिवार प्रबोधन कार्यक्रम में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले जी ने कहा कि "हिन्दुओं का संगठन ही हिन्दुत्व का शाश्वत धर्म है। लेकिन बदलते समय के अनुसार सामाजिक समरसता, परिवार प्रबोधन, पर्यावरण संवर्धन, स्वबोध और नागरिक कर्तव्यों का पालन, यह 'पंच परिवर्तन' का मंत्र ही अब हिन्दुत्व का युगधर्म है"। इस अवसर पर मंच पर हरीक्षेत्र हरिहर स्थित वीरशैव लिंगायत पंचमसाली जगद्गुरु पीठ के जगद्गुरू वचनानंद महास्वामी जी भी उपस्थित रहे। सरकार्यवाह जी ने कहा, "व्यक्ति निर्माण और समाज का संगठन संघ का मूलाधार है। लेकिन युगानुकूल समाज परिवर्तन के लिए संघ ने पंच परिवर्तन का विचार सामने रखा है। जन्म के आधार पर होने वाला भेदभाव ईश्वर विरोधी है और उसका हिन्दू समाज में स्थान नहीं है। समाज में भेदभाव संपूर्ण रूप से नष्ट होना चाहिए। पर्यावरण संवर्धन के लिए केवल कानून बनाने से काम नहीं होगा, बल्कि उसे नित्य संस्कार द्वारा सुदृढ़ करना होगा। नागरिकों को संविधान द्वारा दिये गए अधिकारों के साथ-साथ अपने कर्तव्यों का भी बोध होना चाहिए। परिवार राष्ट्र की आर्थिक और सामाजिक ईकाई है। इसी परिवार प्रणाली के कारण भारत ने हजारों वर्षों तक विदेशी आक्रमणों का सफलता से सामना किया। लेकिन आज के तकनीकी युग में पश्चिमी देशों के अंधानुकरण के चलते हमारी परिवार प्रणाली के समक्ष बड़ी चुनौती खड़ी हुई है"। उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र में रहने वाले हर व्यक्ति को मराठी भाषा आनी ही चाहिए। "भारत की हर भाषा में विश्व का श्रेष्ठ साहित्य निर्माण हुआ है। बच्चों को विदेशी भाषा अवश्य सिखाएं, लेकिन मातृभाषा बोलने में कोई हीनभाव नहीं होना चाहिए। भाषा और संस्कृति के विषय में केवल गर्व करने से काम नहीं होगा, बल्कि उसका प्रतिदिन आचरण करना होगा।" दत्तात्रेय होसबाले जी ने कहा... परिवार भारत का प्राण - परिवार से ही राष्ट्र बनता है। भौतिक सुविधाओं के चलते केवल 'घर' बनता है, लेकिन 'परिवार' आत्मीयता से ही बनता है। भारतीय हिन्दू जीवन पद्धति की परिवार प्रणाली की प्रशंसा पूरे विश्व में होती है। आज संयुक्त परिवार प्रणाली शायद व्यावहारिक रूप से संभव न हो, लेकिन परिवार में आपसी संबंध, प्रेम और आत्मीयता बनी रहना आवश्यक है। सोशल मीडिया की चुनौती - आज सोशल मीडिया और स्वार्थ के युग में पश्चिम के अंधानुकरण के कारण परिवार बिखर रहे हैं। ऐसे समय में नई पीढ़ी को योग्य संस्कार देना अधिक जिम्मेदारी का कार्य है। परिवार को केवल व्यवस्था न बनाते हुए उसे संस्कारों का केंद्र बनाना चाहिए। पहले हिन्दू फिर लिंगायत - वचनानंद महास्वामी जी चिकित्सा पद्धति का भविष्य योग और प्राकृतिक उपचार में ही है, यह कहते हुए वचनानंद महास्वामी जी ने कहा, "वर्तमान में हिन्दू समुदाय को विभाजित करने के प्रयास जारी हैं। लेकिन लिंगायत सर्वप्रथम हिन्दू है और बाद में लिंगायत है, यह विचार स्पष्ट होना चाहिए।"

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