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नारी केवल समाज की आधारशिला ही नहीं, बल्कि राष्ट्र के भविष्य की निर्माता भी है– राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु

नई दिल्ली के विज्ञान भवन में आयोजित महिला विचारकों के दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन “भारती- नारी से नारायणी के समापन सत्र को संबोधित किया।

By चंद्रशेखर March 09, 2026
समाचार › देश-विशेष
नारी केवल समाज की आधारशिला ही नहीं, बल्कि राष्ट्र के भविष्य की निर्माता भी है– राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु
नई दिल्ली, 8 मार्च। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने कहा कि भारतीय समाज और राष्ट्र की प्रगति में महिलाओं की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि शिक्षित, आत्मनिर्भर और सशक्त महिलाएं किसी भी देश के विकास की सबसे बड़ी शक्ति होती हैं। उन्होंने कहा कि भारत सिर्फ जमीन का टुकड़ा नहीं है, बल्कि राष्ट्र पुरुष और राष्ट्र माता है। राष्ट्रपति ने ये विचार नई दिल्ली के विज्ञान भवन में आयोजित महिला विचारकों के दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन “भारती- नारी से नारायणी के समापन सत्र को संबोधित करते हुए व्यक्त किए। यह सम्मेलन सात–आठ मार्च को आयोजित किया गया, जिसमें देश भर से विभिन्न क्षेत्रों से जुड़ी महिला विचारक शामिल हुईं। राष्ट्रपति ने कहा कि भारतीय परंपरा में नारी को केवल परिवार की संरक्षक के रूप में नहीं देखा गया है, बल्कि उसे ज्ञान, शक्ति और समृद्धि का प्रतीक माना गया है। उन्होंने कहा कि आज की भारतीय महिलाएं शिक्षा, विज्ञान, प्रशासन, खेल, उद्यमिता और सामाजिक सेवा जैसे अनेक क्षेत्रों में उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल कर रही हैं और राष्ट्र निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान दे रही हैं। उन्होंने कहा कि किसी भी समाज की वास्तविक प्रगति तभी संभव है, जब महिलाओं को समान अवसर, सम्मान और सुरक्षा प्राप्त हो। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि महिलाओं को निर्णय लेने की स्वतंत्रता, आत्मसम्मान के साथ जीवन जीने का अवसर और शिक्षा तथा रोजगार के समान अवसर मिलना अत्यंत आवश्यक है। राष्ट्रपति ने यह भी कहा कि आज भारत में महिला-नेतृत्व वाले विकास की अवधारणा तेजी से आगे बढ़ रही है। उन्होंने युवतियों को प्रोत्साहित करते हुए कहा कि वे अपने सपनों को साकार करने के लिए आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ें और देश के विकास में सक्रिय भूमिका निभाएं। राष्ट्रपति ने अपने संबोधन में कहा कि जब महिलाएं सशक्त होती हैं तो परिवार, समाज और राष्ट्र सभी मजबूत बनते हैं। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि भारत की महिलाएं अपने ज्ञान, नेतृत्व और संवेदनशीलता के माध्यम से देश को प्रगति और समृद्धि की नई ऊंचाइयों तक ले जाएंगी। समापन समारोह में राष्ट्र सेविका समिति की मुख्य संचालिका सुश्री वी. शांता कुमारी ने कहा कि महिलाओं को समाज का प्रोत्साहन स्वीकार करना चाहिए। क्षमता बढ़ाने से सम्मान हमें स्वयं ही प्राप्त हो जाता है। हमारा व्यवहार ऐसा होना चाहिए कि समाज हमें प्रोत्साहन दे। प्रोत्साहन का उपयोग कर समाज के उत्थान का प्रयास करना चाहिए। उन्होंने कहा कि सम्मान प्राप्त करने के बाद यानी नारी से नारायणी बनने के बाद हम हर क्षेत्र में आगे जाएंगे। हमें भारतीय संस्कृति की जड़ों से जुड़ कर काम करना है और उस पर अभिमान भी करना है। इस तरह हम दूसरों के लिए आदर्श बन सकते हैं। शांता कुमारी ने कहा कि भारतीय नारियों को अपने ज्ञान का उपयोग अपने आसपास के क्षेत्रों में करते हुए सकारात्मक वातावरण बनाना चाहिए। अपने परिवार को समर्थ बनाकर पूरे समाज को, पूरे राष्ट्र को सक्षम बनाने में योगदान देना चाहिए। इस मौके पर भारतीय विद्वत परिषद की सचिव शिवानी वी. ने सम्मेलन के उद्देश्यों की जानकारी दी। भारती- नारी से नारायणी सम्मेलन का उद्देश्य महिलाओं की “मौन शक्ति से निर्णायक शक्ति” तक की यात्रा को सशक्त बनाना है। इस सम्मेलन में देश भर से लगभग 1500 महिला विचारकों ने भाग लिया और महिला सशक्तीकरण, शिक्षा, नेतृत्व, आत्मनिर्भरता और समाज में महिलाओं की भूमिका जैसे विषयों पर विचार-विमर्श किया गया। सम्मेलन का आयोजन भारतीय विद्वत परिषद, राष्ट्र सेविका समिति और शरण्या संगठन ने किया। सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य देश की महिलाओं को एक मंच पर जोड़ना, उनके अनुभवों और विचारों को साझा करना तथा महिला-नेतृत्व वाले राष्ट्र निर्माण की दिशा में ठोस पहल करना है।

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