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लोग पूछते हैं संघ ने स्वतंत्रता के लिए क्या किया, तो यह जानने के लिए उन्हें अध्ययन करना चाहिए- राज्यपाल

डॉ. केशव हेडगेवार पर बिड़ला सभागार में हुआ नाटक का मंचन।

By चंद्रशेखर May 16, 2026
समाचार › राजस्थान विविध
लोग पूछते हैं संघ ने स्वतंत्रता के लिए क्या किया, तो यह जानने के लिए उन्हें अध्ययन करना चाहिए- राज्यपाल
जयपुर, 16 मई। बिड़ला ऑडिटोरियम में शनिवार को युग प्रवर्तक डॉ. हेडगेवार, संघ सृजन का नाट्य अविष्कार शीर्षक से नाटक का भव्य मंचन हुआ। इस अवसर पर मुख्य अतिथि राज्यपाल हरिभाऊ बागड़े ने कहा डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार पर मंचित इस नाटक से आपको उनके जीवन का परिचय होगा। उन्होंने स्कूल में अंग्रेज महारानी द्वारा बाँटी गई मिठाई ग्रहण नहीं की क्योंकि वो हमारी महारानी नहीं थी। डॉ. साहब ने कांग्रेस के अधिवेशन में घोषणा की कि यही हिन्दू राष्ट्र है। उन्होंने कहा, लोग बोलते हैं कि स्वतंत्रता के लिए संघ ने क्या किया तो यह जानने के लिए उन्हें अध्ययन करना चाहिए। संघ ने सुराज के लिए एकजुटता की आवश्यकता पर बल दिया। डॉ. साहब अंतिम समय काफ़ी बीमार रहे। 1940 में तृतीय वर्ष के संघ शिक्षा वर्ग में आए तो सभी स्वयंसेवकों को देख कर उन्होंने कहा, मैं यहां भारत का छोटा रूप देख रहा हूँ। पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने आर्गेनाइजर में लेख लिखा था, जिसमें बताया कि मैं आज जो कुछ हूँ, संघ के प्रचारक नारायणराव तर्टे के कारण हूँ। डॉ. साहब ने ही नानाजी देशमुख को पिलानी में प्रचारक बनने के लिए भेजा। उन्होंने कहा, एक प्रचारक कभी अपने अनुभव भूलता नहीं है। एक एक रुपया जमा कर विवेकानंद जी का स्मारक बनाया। मोरोपन्त पिंगले ने स्वयंसेवकों को प्रेरित किया कि ऐसा अचार विचार का वातावरण बनाना है, जिससे विकास का मार्ग प्रशस्त हो। संघ का काम देश सेवा का बहुत बड़ा काम है। अपना काम तन्मयता से करते रहें तो काम बड़ा होता है। स्वयंसेवकों ने संघर्ष के कठिन दिन देखे हैं। कार्यक्रम के अध्यक्ष डॉ. रमेशचंद अग्रवाल ने कहा राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का काम नदी के पुण्य प्रवाह की तरह चल रहा है। संघ का विशाल स्वरूप इसी भक्ति भाव का प्रतीक है। महामंडलेश्वर गणेश दास जी महाराज ने कहा डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार दूरदर्शी व्यक्ति थे जो आज की पीढ़ी के लिए प्रेरणा का स्रोत व मार्गदर्शक हैं। विशिष्ट अतिथि उप मुख्यमंत्री दिया कुमारी ने कहा यह नाट्य प्रस्तुति राष्ट्रीय चेतना की सांगठनात्मक शक्ति का प्रवाहक है। डॉ. हेडगेवार ने कहा था कि राष्ट्रीय चेतना व्यक्ति निर्माण का महत्वपूर्ण अंग है। प्रज्ञा प्रवाह द्वारा आयोजित कार्यक्रम संस्कृति व संस्कारों से समाज को जोड़ने का काम कर रहा है। आइये हम सभी समृद्ध सांस्कृतिक व प्रेरणादायी भारत का निर्माण करें। नादब्रह्म के प्रचार प्रमुख रवींद्र सहस्त्रबुद्धे ने आभार व्यक्त किया। डॉ. अजय प्रधान द्वारा लिखित इस नाटक का निर्देशन सुबोध सुरजीकर ने किया है। निर्माता पद्मकर धनोरकर हैं। संगीत शैलेश दाणी का रहा। नागपुर की नादब्रह्म टीम ने यह नाटक तैयार किया है। नादब्रह्म नागपुर के 45 स्वयंसेवकों का संगठन है।

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